पथेर पांचाली
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बंगाल के निश्चिंदीपुर गाँव में अपू और उसकी बड़ी बहन दुर्गा का बचपन अभावों के बीच भी आश्चर्य और उमंग से भरा है। पुरोहिताई करने वाले सीधे-सादे पिता और घर की तंगहाली से जूझती माँ के साए में, दोनों बच्चे प्रकृति की गोद में अपनी एक अलग दुनिया बना लेते हैं। जंगलों में फल तलाशना, पहली बारिश में भीगना और दूर पटरियों से गुज़रती रेलगाड़ी की छुक-छुक सुनकर रोमांचित होना—यही उनकी खुशियों का संसार है। जीवन की कड़वी सच्चाइयों के बीच बचपन की मासूमियत और सजीवता को दर्शाती यह कहानी मानवीय रिश्तों और प्रकृति के सौंदर्य का एक अनूठा संगम है।
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Table of Contents
1
पहला परिच्छेद
2
दूसरा परिच्छेद
3
तीसरा परिच्छेद
4
चौथा परिच्छेद
5
पाँचवाँ परिच्छेद
6
छठा परिच्छेद
7
सातवाँ परिच्छेद
8
आठवाँ परिच्छेद
9
नौवाँ परिच्छेद
10
दसवाँ परिच्छेद
11
ग्यारहवाँ परिच्छेद
12
बारहवाँ परिच्छेद
13
तेरहवाँ परिच्छेद
14
चौदहवाँ परिच्छेद
15
पंद्रहवाँ परिच्छेद
16
सोलहवाँ परिच्छेद
17
सत्रहवाँ परिच्छेद
18
अठारहवाँ परिच्छेद
19
उन्नीसवाँ परिच्छेद
20
बीसवाँ परिच्छेद
21
इक्कीसवाँ परिच्छेद
22
बाईसवाँ परिच्छेद
23
तेईसवाँ परिच्छेद
24
चौबीसवाँ परिच्छेद
25
पच्चीसवाँ परिच्छेद
26
छब्बीसवाँ परिच्छेद
27
सत्ताइसवाँ परिच्छेद
28
अट्ठाईसवाँ परिच्छेद
29
उनतीसवाँ परिच्छेद
30
तीसवाँ परिच्छेद
31
इकतीसवाँ परिच्छेद
32
बत्तीसवाँ परिच्छेद
33
तैंतीसवाँ परिच्छेद
34
चौंतीसवाँ परिच्छेद
35
पैंतीसवाँ परिच्छेद