पोन्नियिन सेल्वन by Matribhasa Hindi
आठवाँ परिच्छेद — “पालकी में कौन?”
1. पहला अध्याय — शुभ आरम्भ
2. दूसरा अध्याय — आऴ्वारक्काडियान नंबि
3. तीसरा अध्याय — विण्णगर मंदिर
4. चौथा अध्याय — कड़म्बूर प्रासाद
5. पाँचवाँ अध्याय — कुरवै कूत्तु
6. छठा अध्याय — मध्यरात्रि की बैठक
7. सातवाँ अध्याय — हँसी — और उसका परिणाम
8. आठवाँ परिच्छेद — “पालकी में कौन?”
9. नौवाँ अध्याय — राह किनारे कुछ बातें
10. दसवाँ अध्याय — कुडंदै का ज्योतिषी
11. ग्यारहवाँ अध्याय — आँधी की तरह प्रवेश
12. बारहवाँ अध्याय — नंदिनी
13. तेरहवाँ अध्याय — बढ़ता चाँद
14. चौदहवाँ अध्याय — नदी-तट का मगरमच्छ
15. पंद्रहवाँ अध्याय — बानति की छलना
16. सोलहवाँ अध्याय — अरुलमोऴि वर्मन
17. सत्रहवाँ अध्याय — दौड़ते घोड़े की कहानी
18. अठारहवाँ अध्याय — इडुंबनकारी
19. उन्नीसवाँ अध्याय — ख़ून, रक्तपात और एक आतंक का जंगल
20. बीसवाँ अध्याय — पहला शत्रु!
21. इक्कीसवाँ अध्याय — काँपता पर्दा
22. बाइसवाँ अध्याय — वेलक्कार वाहिनी
23. तेईसवाँ अध्याय — अमुदन की माँ
24. चौबीसवाँ अध्याय — कौआ और कोयल
25. पच्चीसवाँ अध्याय — दुर्ग के भीतर
26. छब्बीसवाँ अध्याय — अभयम्! अभयम्!
27. सत्ताईसवाँ अध्याय — दरबारी कवि
28. अठाईसवाँ अध्याय — लोहे की मुट्ठी
29. उन्तीसवाँ अध्याय — हमारे सम्मानित अतिथि
30. तीसवाँ अध्याय — चित्र-मंडप
31. इकतीसवाँ अध्याय — “चोर! चोर!”
32. बत्तीसवाँ अध्याय — जिरह
33. तैंतीसवाँ अध्याय — वृक्ष पर एक दासी!
34. चौंतीसवाँ अध्याय — लतामंडप
35. पैंतीसवाँ अध्याय — मंत्रवादी
36. छत्तीसवाँ अध्याय — “स्मरण है?”
37. सैंतीसवाँ अध्याय — दो सिंहों का संघर्ष
38. अड़तीसवाँ अध्याय — छलनामयी नंदिनी
39. उनचालीसवाँ अध्याय — घूमती पृथ्वी
40. चालीसवाँ अध्याय — विषाद-ग्रस्त प्रासाद
41. इकतालीसवाँ अध्याय — गुप्त ख़ज़ाना
42. बयालीसवाँ अध्याय — सच्चे मित्र का चिह्न
43. तैंतालीसवाँ अध्याय — पऴैयरै
44. चौवालीसवाँ अध्याय — “यह सब उसी लड़की का किया-धरा है!”
45. पैंतालीसवाँ अध्याय — भगोड़ा गुप्तचर
46. छियालीसवाँ अध्याय — जनता की सुगबुगाहट
47. सैंतालीसवाँ अध्याय — ईशान शिव भट्टर
48. अड़तालीसवाँ अध्याय — भँवर और भँवराती आँखें
49. उनचासवाँ अध्याय — विस्मय पर विस्मय!
50. पचासवाँ अध्याय — परांतक आरोग्यशाला
51. इक्यावनवाँ अध्याय — मामल्लपुरम
52. बावनवाँ अध्याय — बूढ़े और ब्याह की बातें
53. तिरेपनवाँ अध्याय — मलयमान का क्रोध
54. चौवनवाँ अध्याय — विष से भी घातक वह नारी!
55. पचपनवाँ अध्याय — नंदिनी का प्रेमी
56. छप्पनवाँ अध्याय — अन्तःपुर की वह घटना
57. सत्तावनवाँ अध्याय — माया मोहिनी
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आठवाँ परिच्छेद — “पालकी में कौन?”
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