पोन्नियिन सेल्वन
Completed Historical Fiction
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57 parts
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चोल साम्राज्य अपने वैभव के शिखर पर है, लेकिन राजमहल की दीवारों के पीछे षड्यंत्र की चिंगारी सुलग रही है। एक निडर और चतुर संदेशवाहक, वंदियत्तेवन, युवराज का एक अत्यंत गुप्त संदेश लेकर राजधानी की ओर बढ़ता है। रास्ते में उसका सामना केवल बीहड़ रास्तों से नहीं, बल्कि सिंहासन को हिला देने वाली साज़िशों और बागी सरदारों से होता है। पुरानी रंजिशें, वर्जित आकर्षण और प्रतिशोध की आग पूरे साम्राज्य को निगलने के लिए तैयार है। क्या यह अकेला दूत समय रहते सम्राट और चोल वंश को इस आने वाले संकट से बचा सकेगा?
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Table of Contents
1
पहला अध्याय — शुभ आरम्भ
2
दूसरा अध्याय — आऴ्वारक्काडियान नंबि
3
तीसरा अध्याय — विण्णगर मंदिर
4
चौथा अध्याय — कड़म्बूर प्रासाद
5
पाँचवाँ अध्याय — कुरवै कूत्तु
6
छठा अध्याय — मध्यरात्रि की बैठक
7
सातवाँ अध्याय — हँसी — और उसका परिणाम
8
आठवाँ परिच्छेद — “पालकी में कौन?”
9
नौवाँ अध्याय — राह किनारे कुछ बातें
10
दसवाँ अध्याय — कुडंदै का ज्योतिषी
11
ग्यारहवाँ अध्याय — आँधी की तरह प्रवेश
12
बारहवाँ अध्याय — नंदिनी
13
तेरहवाँ अध्याय — बढ़ता चाँद
14
चौदहवाँ अध्याय — नदी-तट का मगरमच्छ
15
पंद्रहवाँ अध्याय — बानति की छलना
16
सोलहवाँ अध्याय — अरुलमोऴि वर्मन
17
सत्रहवाँ अध्याय — दौड़ते घोड़े की कहानी
18
अठारहवाँ अध्याय — इडुंबनकारी
19
उन्नीसवाँ अध्याय — ख़ून, रक्तपात और एक आतंक का जंगल
20
बीसवाँ अध्याय — पहला शत्रु!
21
इक्कीसवाँ अध्याय — काँपता पर्दा
22
बाइसवाँ अध्याय — वेलक्कार वाहिनी
23
तेईसवाँ अध्याय — अमुदन की माँ
24
चौबीसवाँ अध्याय — कौआ और कोयल
25
पच्चीसवाँ अध्याय — दुर्ग के भीतर
26
छब्बीसवाँ अध्याय — अभयम्! अभयम्!
27
सत्ताईसवाँ अध्याय — दरबारी कवि
28
अठाईसवाँ अध्याय — लोहे की मुट्ठी
29
उन्तीसवाँ अध्याय — हमारे सम्मानित अतिथि
30
तीसवाँ अध्याय — चित्र-मंडप
31
इकतीसवाँ अध्याय — “चोर! चोर!”
32
बत्तीसवाँ अध्याय — जिरह
33
तैंतीसवाँ अध्याय — वृक्ष पर एक दासी!
34
चौंतीसवाँ अध्याय — लतामंडप
35
पैंतीसवाँ अध्याय — मंत्रवादी
36
छत्तीसवाँ अध्याय — “स्मरण है?”
37
सैंतीसवाँ अध्याय — दो सिंहों का संघर्ष
38
अड़तीसवाँ अध्याय — छलनामयी नंदिनी
39
उनचालीसवाँ अध्याय — घूमती पृथ्वी
40
चालीसवाँ अध्याय — विषाद-ग्रस्त प्रासाद
41
इकतालीसवाँ अध्याय — गुप्त ख़ज़ाना
42
बयालीसवाँ अध्याय — सच्चे मित्र का चिह्न
43
तैंतालीसवाँ अध्याय — पऴैयरै
44
चौवालीसवाँ अध्याय — “यह सब उसी लड़की का किया-धरा है!”
45
पैंतालीसवाँ अध्याय — भगोड़ा गुप्तचर
46
छियालीसवाँ अध्याय — जनता की सुगबुगाहट
47
सैंतालीसवाँ अध्याय — ईशान शिव भट्टर
48
अड़तालीसवाँ अध्याय — भँवर और भँवराती आँखें
49
उनचासवाँ अध्याय — विस्मय पर विस्मय!
50
पचासवाँ अध्याय — परांतक आरोग्यशाला
51
इक्यावनवाँ अध्याय — मामल्लपुरम
52
बावनवाँ अध्याय — बूढ़े और ब्याह की बातें
53
तिरेपनवाँ अध्याय — मलयमान का क्रोध
54
चौवनवाँ अध्याय — विष से भी घातक वह नारी!
55
पचपनवाँ अध्याय — नंदिनी का प्रेमी
56
छप्पनवाँ अध्याय — अन्तःपुर की वह घटना
57
सत्तावनवाँ अध्याय — माया मोहिनी