दुर्गेशनंदिनी
Completed Historical Fiction
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मुग़ल और पठानों के संघर्ष के बीच बंगाल में सत्ता की लड़ाई चरम पर है। इसी उथल-पुथल में मुग़ल सेना का राजपूत योद्धा, जगत सिंह, घायल होकर एक दुर्ग में शरण लेता है। वहाँ उसकी नज़र दुर्गपति की रूपवती कन्या तिलोत्तमा पर पड़ती है और दोनों के दिलों में प्रेम का अंकुर फूटता है। लेकिन युद्ध के इस दौर में भावनाएँ सुरक्षित नहीं रहतीं। दुश्मन की क़ैद, कर्तव्य की पुकार और दिल की चाहत के बीच घिरा जगत सिंह खुद को एक कठिन अग्निपरीक्षा में पाता है। क्या तलवारों की खनक और सियासत के दांव-पेच के बीच यह प्रेम जीवित रह पाएगा?
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Table of Contents
1
प्रथम खण्ड — प्रथम परिच्छेद : देवमंदिर
2
प्रथम खण्ड — द्वितीय परिच्छेद : आलाप
3
प्रथम खण्ड — तृतीय परिच्छेद : मुगल-पठान
4
प्रथम खण्ड — चतुर्थ परिच्छेद : नवीन सेनापति
5
प्रथम खण्ड — पंचम परिच्छेद : गढ़ मान्दारण
6
प्रथम खण्ड — षष्ठ परिच्छेद : अभिराम स्वामी की मंत्रणा
7
प्रथम खण्ड — सप्तम परिच्छेद : असावधानी
8
प्रथम खण्ड — अष्टम परिच्छेद : विमला की मन्त्रणा
9
प्रथम खण्ड — नवम परिच्छेद : कुलतिलक
10
प्रथम खंड — दशम परिच्छेद : मंत्रणा के पश्चात् उद्योग
11
प्रथम खण्ड — एकादश परिच्छेद : आशमानी का दौत्य
12
प्रथम खण्ड — द्वादश परिच्छेद : आसमानी का अभिसार
13
प्रथम खण्ड — त्रयोदश परिच्छेद : आसमानी का प्रेम
14
प्रथम खण्ड — चतुर्दश परिच्छेद : दिग्गज-हरण
15
प्रथम खण्ड — पञ्चदश परिच्छेद : दिग्गज का साहस
16
प्रथम खण्ड — षोडश परिच्छेद : शैलेश्वर-साक्षात्कार
17
प्रथम खण्ड — सप्तदश परिच्छेद : वीरपंचमी
18
प्रथम खण्ड — अष्टादश परिच्छेद : चतुर से चतुर
19
प्रथम खण्ड — उन्नीसवाँ परिच्छेद : प्रेमियों में
20
प्रथम खण्ड — विंश परिच्छेद : प्रकोष्ठ-प्रकोष्ठ में
21
प्रथम खण्ड — एकविंश परिच्छेद : खड्ग से खड्ग
22
द्वितीय खण्ड — प्रथम परिच्छेद : आयशा
23
द्वितीय खण्ड — द्वितीय परिच्छेद : कुसुम में पाषाण
24
द्वितीय खंड — तृतीय परिच्छेद : क्या तुम तिलोत्तमा नहीं हो?
25
द्वितीय खण्ड — चतुर्थ परिच्छेद : अवगुण्ठनवती
26
द्वितीय खण्ड — पंचम परिच्छेद : विधवा
27
द्वितीय खण्ड — षष्ठ परिच्छेद : विमला का पत्र
28
द्वितीय खण्ड — सप्तम परिच्छेद : विमला का पत्र समाप्त
29
द्वितीय खंड — अष्टम परिच्छेद : आरोग्य
30
द्वितीय खंड — नवम परिच्छेद : दिग्गज संवाद
31
द्वितीय खण्ड — दशम परिच्छेद : प्रतिमा विसर्जन
32
द्वितीय खण्ड — एकादश परिच्छेद : गृहान्तर
33
द्वितीय खण्ड — द्वादश परिच्छेद : अलौकिक आभरण
34
द्वितीय खंड — त्रयोदश परिच्छेद : अंगुलीय प्रदर्शन
35
द्वितीय खण्ड — चतुर्दश परिच्छेद : मोह
36
द्वितीय खण्ड — पंचदश परिच्छेद : मुक्त कण्ठ
37
द्वितीय खण्ड — षोडश परिच्छेद : दासी के चरणों में
38
द्वितीय खण्ड — सप्तदश परिच्छेद : अंतिम काल
39
द्वितीय खण्ड — अष्टादश परिच्छेद : प्रतियोगिता
40
द्वितीय खंड — ऊनविंश परिच्छेद : आयशा का पत्र
41
द्वितीय खंड — विंश परिच्छेद : दीप निर्वाणोन्मुख
42
द्वितीय खंड — एकविंश परिच्छेद : सफल में निष्फल स्वप्न