दुर्गेशनंदिनी by Matribhasa Hindi
द्वितीय खण्ड — षोडश परिच्छेद : दासी के चरणों में
1. प्रथम खण्ड — प्रथम परिच्छेद : देवमंदिर
2. प्रथम खण्ड — द्वितीय परिच्छेद : आलाप
3. प्रथम खण्ड — तृतीय परिच्छेद : मुगल-पठान
4. प्रथम खण्ड — चतुर्थ परिच्छेद : नवीन सेनापति
5. प्रथम खण्ड — पंचम परिच्छेद : गढ़ मान्दारण
6. प्रथम खण्ड — षष्ठ परिच्छेद : अभिराम स्वामी की मंत्रणा
7. प्रथम खण्ड — सप्तम परिच्छेद : असावधानी
8. प्रथम खण्ड — अष्टम परिच्छेद : विमला की मन्त्रणा
9. प्रथम खण्ड — नवम परिच्छेद : कुलतिलक
10. प्रथम खंड — दशम परिच्छेद : मंत्रणा के पश्चात् उद्योग
11. प्रथम खण्ड — एकादश परिच्छेद : आशमानी का दौत्य
12. प्रथम खण्ड — द्वादश परिच्छेद : आसमानी का अभिसार
13. प्रथम खण्ड — त्रयोदश परिच्छेद : आसमानी का प्रेम
14. प्रथम खण्ड — चतुर्दश परिच्छेद : दिग्गज-हरण
15. प्रथम खण्ड — पञ्चदश परिच्छेद : दिग्गज का साहस
16. प्रथम खण्ड — षोडश परिच्छेद : शैलेश्वर-साक्षात्कार
17. प्रथम खण्ड — सप्तदश परिच्छेद : वीरपंचमी
18. प्रथम खण्ड — अष्टादश परिच्छेद : चतुर से चतुर
19. प्रथम खण्ड — उन्नीसवाँ परिच्छेद : प्रेमियों में
20. प्रथम खण्ड — विंश परिच्छेद : प्रकोष्ठ-प्रकोष्ठ में
21. प्रथम खण्ड — एकविंश परिच्छेद : खड्ग से खड्ग
22. द्वितीय खण्ड — प्रथम परिच्छेद : आयशा
23. द्वितीय खण्ड — द्वितीय परिच्छेद : कुसुम में पाषाण
24. द्वितीय खंड — तृतीय परिच्छेद : क्या तुम तिलोत्तमा नहीं हो?
25. द्वितीय खण्ड — चतुर्थ परिच्छेद : अवगुण्ठनवती
26. द्वितीय खण्ड — पंचम परिच्छेद : विधवा
27. द्वितीय खण्ड — षष्ठ परिच्छेद : विमला का पत्र
28. द्वितीय खण्ड — सप्तम परिच्छेद : विमला का पत्र समाप्त
29. द्वितीय खंड — अष्टम परिच्छेद : आरोग्य
30. द्वितीय खंड — नवम परिच्छेद : दिग्गज संवाद
31. द्वितीय खण्ड — दशम परिच्छेद : प्रतिमा विसर्जन
32. द्वितीय खण्ड — एकादश परिच्छेद : गृहान्तर
33. द्वितीय खण्ड — द्वादश परिच्छेद : अलौकिक आभरण
34. द्वितीय खंड — त्रयोदश परिच्छेद : अंगुलीय प्रदर्शन
35. द्वितीय खण्ड — चतुर्दश परिच्छेद : मोह
36. द्वितीय खण्ड — पंचदश परिच्छेद : मुक्त कण्ठ
37. द्वितीय खण्ड — षोडश परिच्छेद : दासी के चरणों में
38. द्वितीय खण्ड — सप्तदश परिच्छेद : अंतिम काल
39. द्वितीय खण्ड — अष्टादश परिच्छेद : प्रतियोगिता
40. द्वितीय खंड — ऊनविंश परिच्छेद : आयशा का पत्र
41. द्वितीय खंड — विंश परिच्छेद : दीप निर्वाणोन्मुख
42. द्वितीय खंड — एकविंश परिच्छेद : सफल में निष्फल स्वप्न
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द्वितीय खण्ड — षोडश परिच्छेद : दासी के चरणों में
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